LAW'S VERDICT

चार साल की देरी पर हाईकोर्ट ने जताया खेद, सिविल जज भर्ती पर उठे सवाल



भर्ती प्रक्रिया के नियमों की वैधता पर 4 मई को होगी निर्णायक सुनवाई

जबलपुर। मध्य प्रदेश में सिविल जज भर्ती प्रक्रिया में देरी और विवादों ने आखिरकार हाईकोर्ट की नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया। बुधवार को मुख्य न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट हर साल समय पर भर्ती के निर्देश दे चुका है, तब चार साल की देरी “गंभीर प्रशासनिक विफलता” दर्शाती है। वर्ष 2022 की भर्ती अब तक उलझी रहने पर कोर्ट ने खेद भी जताया। फिलहाल भर्ती प्रक्रिया पर छाए कानूनी बादल अभी छंटे नहीं हैं। 4 मई को होने वाली अंतिम सुनवाई में तय होगा कि सिविल जज भर्ती के नियम टिकेंगे या बदलेंगे। तब तक पूरी प्रक्रिया न्यायिक कसौटी पर है।

बंद कराई गई लाइव स्ट्रीमिंग 

सिविल जज भर्ती नियमों और विज्ञापन की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस संस्था ने दाखिल की है। इस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग तक बंद करा दी। करीब 35 मिनट चली सुनवाई में कोर्ट ने सभी अंतरिम आदेश खत्म कर दिए और भर्ती प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रखने के निर्देश देते हुए मामला 4 मई 2026 को अंतिम बहस के लिए तय कर दिया।

त्रुटिपूर्ण  नियमों के कारण ST वर्ग का चयन नहीं  

याचिकाकर्ताओं ने भर्ती नियम 1994 में किए गए संशोधनों को असंवैधानिक बताते हुए आरोप लगाया है कि लोकसेवा आयोग से बिना परामर्श नियम बनाए गए। मुख्य परीक्षा में आरक्षित और अनारक्षित दोनों वर्गों के लिए 50% एग्रीगेट तय करने को भेदभावपूर्ण बताया गया। दावा किया गया कि इन्हीं त्रुटिपूर्ण नियमों के कारण अनुसूचित जनजाति वर्ग का एक भी अभ्यर्थी चयनित नहीं हो सका।

सार्वजनिक नहीं किये गए प्राप्तांक 

परीक्षा में प्राप्तांक सार्वजनिक न करना भी निशाने पर रहा। अधिवक्ताओं ने इसे “अपारदर्शी और संदिग्ध प्रक्रिया” बताते हुए कहा कि इससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। साक्षात्कार में आरक्षित वर्ग को कम अंक दिए जाने और ‘कम्युनल आरक्षण’ जैसी प्रवृत्तियों के आरोप भी लगाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह, पुष्पेन्द्र कुमार शाह, अखलेश प्रजापति, मधुसूदन कुर्मी, अभिलाषा लोधी ने पक्ष रखा |

कैरी फॉरवर्ड माने जाएंगे पद 

अनारक्षित वर्ग के 17 पदों को बैकलॉग दिखाने पर हाईकोर्ट प्रशासन ने सफाई दी कि यह तकनीकी त्रुटि है और इन्हें कैरी-फॉरवर्ड माना जाएगा। वहीं यह भी बताया गया कि एससी-एसटी अभ्यर्थियों के लिए मुफ्त कोचिंग शुरू की गई है, जिसमें हजार से अधिक पंजीयन हो चुके हैं।

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